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अनमोल वचन शायरी

जिस प्रकार एक जलते दीपक को चमकने के लिय
दूसरे दीपक की जरूरत नहीं होती
उसी प्रकार आत्मा जो स्वयं ज्ञान प्रकाश है
उसे और किसी ज्ञान की जरूरत नहीं होती
अपने स्वयं के ज्ञान के लिय।

वियक्ति को सदा यह समझना चाहिय की
आत्मा एक राजा की तरह है जो
शारीर  , इंद्रियों मान  , बुद्धि और भी जो प्रकृति से बना  है
इन सब से भिन्न है , आत्मा इन सब को साक्षी सुपरुप है।

यह मोह से भरा शंशार एक सपने की ही तरह है
यहाँ तब तक ही सत्य प्रतीत होता है
जब तक वियक्ति अगज्ञानी रूपी निद्रा में सो रहा होता है
परन्तु जाग जाने पर इसकी कोई सत्ता नहीं रहती।

 आत्माँ ज्ञान के कारड ही सीमित प्रतीत होती है
परन्तु जब ज्ञान मिट जाता है , तब आत्मा के वास्तविक
सुरूप का ज्ञान हो जाता है
जैसे बादलों के हटने पर सूरज दिखाई देता है।

सबसे उत्तम तीर्थ अपना मन है
जो विषेश रूप से शुद्ध किया हुआ हो।

सपना वह नहीं जो आप नींद में देखते है
यह तो एक ऐसी चीज़ है
जो आपको नींद ही नहीं आने देती।

इससे पहले की सपने सच हों
आपको सपने देखने होगें।

अपने मिसिन में कामयाब होने के लिय
आपको अपने लछ्य के प्रति एगग्र्चित होना पड़ेगा।

इन्शान को कठिनायों की आवश्य्कता होती है
क्यों की सफलता का आनंद उठाने के लिय ये जरूरी है।

दुनियां के लिय दुनियां के कामों के लिय
भगवान को मत छोटो
छोड़ना पड़े तो भगवान के लिय दुनियां छोड़ दो।

खिल सको तो फूल की तरह खिलो
जल सको तो दीप की तरह जलो
मिल सको तो दूध में पानी की तरह मिलो
ढल सको तो धातू की तरह ढालो
ऐसी ही जीवन की नीति हो , रीती हो प्रीत हो।

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