Bannerad

हिंदी शायरी 146

जमी से जुड़कर आसमाँ की बात करो 
सपने से नहीं हकीकत से मुलाकात करो 
तूफान से डरतें है बुज्दिल यारो 
मुसीबत से मर्द की तरह दो दो हाँथ करो। 


अगर आप अपने दोस्त को आपकी सफलता से ईष्या करते हुय पाते है 
तो समझ ले की वो आपका कभी भी सच्चा दोस्त नहीं हो सकता। 


दुनिया में लोग पहले अपने आप को नहीं देखते है 
और इसलिय वो एक दूसरे पर आरोप लगते है। 

हमारी खुद्किस्मती यह है की 
हम भगबान को एक मानते है पर बदकिस्मती यह है की 
हम भगवान की एक नहीं मानते है। 



झूठ मत वोलो  क्यों की एक छोटा सा झूट भी 
वड़ा अलगाव पैदा कर सकता है। 


कितने अनमोल होते है ये मुहब्बत के रिश्ते 
कोई याद ना भी करे तो भी चाहत रहती है। 


No comments: