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वचन शायरी



मैंने समय नष्ट किया,
और अब समय मुझे नष्ट कर रहा है.

मैं हर उस आदमी की प्रशंशा करूँगा जो मेरी प्रशंशा करेगा.

अगर करना उतना ही आसान होता
जितना की जानना की क्या करना अच्छा है,
तो शवगृह गिरिजाघर होते ,
और गरीबो के झोंपड़े महल.

  

समय के साथ जिससे हम अक्सर डरते हैं
उससे नफरत करने लगते हैं.

वो पिता बुद्धिमान है
जो अपनी संतान को जानता है.


नौकरानियां कुछ नहीं बस पति चाहती हैं,
और जब वो उन्हें पा जाती हैं,
तब उन्हें सब कुछ चाहिए होता है.

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