Bannerad

वचन शायरी



इंसान तभी कुछ करता है जब वो अपने काम के औचित्य को लेकर सुनिश्चित होता है ,
जैसाकि हम विधान सभा में बम फेंकने को लेकर थे.

 
क्रांति मानव जाती का एक अपरिहार्य अधिकार है.
स्वतंत्रता सभी का एक कभी ख़त्म होने वाला जन्म-सिद्ध अधिकार है.
श्रम समाज का वास्तविक निर्वाहक है.


 
ज़िन्दगी तो अपने दम पर ही जी जाती हे
दूसरो के कन्धों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं .”

 


चाहे  वो  गूगल  हो  या  एप्पल  या  फ्री  सौफ्टवेयर ,
हमारे  कुछ  शानदार  प्रतिस्पर्धी  हैं  जो  हमें  चौकन्ना रखते  हैं .


ऐसे  लोग  हैं  जिन्हें  पूँजीवाद  पसंद  नहीं  है ,
और   ऐसे  लोग  भी  हैं  जिन्हें  पर्सनल कम्प्यूटर्स  पसंद  नहीं  है .
पर  ऐसा  कोई  भी  नहीं  है  जिसे  पी सी  पसंद  हो  और 
वो  माइक्रोसोफ्ट  को  पसंद  ना  करता  हो.

No comments: