Bannerad

दोहे हिन्दी



जब  कोई  विचार  अनन्य   रूप  से  मस्तिष्क   पर  अधिकार  कर  लेता  है 
तब  वह  वास्तविक  भौतिक  या  मानसिक  अवस्था  में  परिवर्तित  हो  जाता  है .


भला  हम  भगवान  को  खोजने  कहाँ  जा  सकते  हैं 
अगर  उसे  अपने  ह्रदय  और  हर एक  जीवित  प्राणी  में  नहीं  देख  सकते .


तुम्हे  अन्दर  से  बाहर  की  तरफ  विकसित  होना  है .
कोई  तुम्हे  पढ़ा  नहीं  सकता ,
कोई  तुम्हे  आध्यात्मिक  नहीं  बना  सकता .
तुम्हारी  आत्मा  के आलावा  कोई  और  गुरु  नहीं  है .



तुम  फ़ुटबाल  के  जरिये  स्वर्ग  के  ज्यादा  निकट  होगे 
बजाये  गीता  का  अध्ययन  करने  के .


 दिल  और  दिमाग  के  टकराव  में  दिल  की  सुनो .


किसी  दिन  , जब  आपके  सामने  कोई   समस्या  ना  आये  –
आप  सुनिश्चित  हो  सकते  हैं  कि  आप  गलत  मार्ग  पर  चल  रहे  हैं .



स्वतंत्र  होने  का  साहस  करो .
जहाँ  तक  तुम्हारे  विचार  जाते  हैं 
वहां  तक  जाने  का  साहस  करो ,
और  उन्हें  अपने  जीवन  में  उतारने  का  साहस  करो .

No comments: