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हिन्दी दोहे



अक्सर मैं ऐसे बच्चे जो मुझे अपना साथ दे सकते हैं,
के साथ हंसी-मजाक करता हूँ.
जब तक एक इंसान अपने अन्दर के बच्चे को बचाए रख सकता है
तभी तक जीवन उस अंधकारमयी छाया से दूर रह सकता है
जो इंसान के माथे पर चिंता की रेखाएं छोड़ जाती है.




उठो, जागो और तब तक नहीं रुको जब
तक लक्ष्य ना प्राप्त हो जाये.


उठो मेरे शेरो, इस भ्रम को मिटा दो कि तुम निर्बल हो ,
तुम एक अमर आत्मा हो, स्वच्छंद जीव हो, धन्य हो,
सनातन हो , तुम तत्व  नहीं हो , ना ही शरीर हो ,
तत्व तुम्हारा सेवक है तुम तत्व के सेवक नहीं हो.


ब्रह्माण्ड कि सारी शक्तियां पहले से हमारी हैं.
वो हमीं हैं जो अपनी आँखों पर हाँथ रख लेते हैं
और फिर रोते हैं कि कितना अन्धकार है!


जिस तरह से विभिन्न स्रोतों से उत्पन्न 
धाराएँ अपना जल समुद्र में मिला देती हैं ,
उसी प्रकार मनुष्य द्वारा चुना हर मार्ग,
चाहे अच्छा हो या बुरा भगवान तक  जाता है.

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