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वचन शायरी



जब  तक  आप  सामाजिक  स्वतंत्रता  नहीं  हांसिल  कर  लेते  ,
क़ानून  आपको  जो भी  स्वतंत्रता  देता  है 
वो  आपके  किसी  काम  की  नहीं .

 

यदि  हम  एक   संयुक्त  एकीकृत  आधुनिक  भारत  चाहते  हैं 
तो  सभी  धर्मों  के  शाश्त्रों  की  संप्रभुता  का  अंत  होना  चाहिए .
 
सागर  में  मिलकर  अपनी  पहचान  खो  देने  वाली  पानी  की  एक  बूँद  के  विपरीत ,
इंसान  जिस  समाज  में  रहता  है  वहां  अपनी  पहचान  नहीं  खोता .
इंसान  का  जीवन  स्वतंत्र  है .
वो  सिर्फ  समाज  के  विकास  के  लिए  नहीं  पैदा  हुआ   है ,
बल्कि  स्वयं  के  विकास  के  लिए  पैदा  हुआ   है  .
 

 
हमारे  पास  यह  स्वतंत्रता  किस  लिए  है ?
हमारे  पास  ये  स्वत्नत्रता  इसलिए  है 
ताकि  हम  अपने  सामाजिक  व्यवस्था ,
जो  असमानता , भेद-भाव  और  अन्य   चीजों  से  भरी  है ,
जो  हमारे  मौलिक  अधिकारों  से  टकराव  में  है  को  सुधार  सकें.


एक मेज , एक कुर्सी, एक कटोरा फल और एक वायलन ;
भला खुश रहने के लिए और क्या चाहिए?

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