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दोहे हिन्दी



किसी की निंदा ना करें.
अगर आप मदद के लिए हाथ बढ़ा सकते हैं,
तो ज़रुर बढाएं.अगर नहीं बढ़ा सकते,
तो अपने हाथ जोड़िये,
अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये,
और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये.


कभी मत सोचिये कि आत्मा के लिए कुछ असंभव है.
ऐसा सोचना सबसे बड़ा विधर्म है.अगर कोई  पाप है,
तो वो यही है;
ये कहना कि तुम निर्बल  हो या अन्य निर्बल हैं.


अगर धन दूसरों की भलाई  करने में मदद करे,
तो इसका कुछ मूल्य है, अन्यथा,
ये सिर्फ बुराई का एक ढेर है,
और इससे जितना जल्दी छुटकारा मिल जाये उतना बेहतर है.


एक शब्द में,
यह आदर्श है कि तुम परमात्मा हो.


उस व्यक्ति ने अमरत्त्व प्राप्त कर लिया है,
जो किसी  सांसारिक वस्तु से व्याकुल नहीं होता.


हम वो हैं जो हमें हमारी सोच ने बनाया है,
इसलिए इस बात का धयान रखिये कि आप क्या सोचते हैं.
शब्द गौण हैं. विचार रहते हैं, वे दूर तक यात्रा करते हैं.

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