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हिन्दी शायरी



प्रसन्नता पहले से निर्मित कोई चीज नहीं है..
ये आप ही के कर्मों से आती है.
 
यदि आप दूसरों की मदद कर सकते हैं,
तो अवश्य करें; यदि नहीं कर सकते हैं
तो कम से कम उन्हें नुकसान नही पहुचाइए.
 
 यदि  आपकी  कोई विशेष निष्ठा या धर्म है,
तो अच्छा है. लेकिन आप उसके बिना भी जी सकते हैं.
 
यदि आप दूसरों को प्रसन्न देखना चाहते हैं
तो करुणा का भाव रखें. यदि आप स्वयम प्रसन्न रहना चाहते हैं
तो भी करुणा का भाव रखें.
 
 
सहिष्णुता के अभ्यास में,
आपका शत्रु ही आपका सबसे अच्छा शिक्षक होता है.

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