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Navneet Shakya



जो लोग इमानदारी से काम करते हैं वो सबसे प्रसन्न होते हैं.
 

 
सेवक को तब परखें जब वह काम ना कर रहा हो,
रिश्तेदार को किसी कठिनाई  में ,
मित्र को संकट में ,
और पत्नी को घोर विपत्ति में.
 
संतुलित दिमाग से जैसी  कोई सादगी नहीं है,
संतोष जैसा  कोई सुख नहीं है,
लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है,
और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है.
 
यदि किसी का स्वभाव अच्छा है तो उसे किसी और गुण की क्या जरूरत है ?
यदि आदमी के पास प्रसिद्धि है
तो भला उसे और किसी सिंगार की क्या आवश्यकता है.
 
हे बुद्धिमान लोगों ! अपना धन उन्ही को दो जो उसके योग्य हों और किसी को नहीं.
बादलों के द्वारा लिया गया समुद्र का जल हमेशा मीठा होता है.
 
पृथ्वी सत्य की शक्ति द्वारा समर्थित है;
ये सत्य की शक्ति ही है जो सूरज को चमक और हवा को वेग देती है;
दरअसल सभी चीजें सत्य पर निर्भर करती हैं.

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